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Antim Vikalp News

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ज्वलंत यक्ष प्रश्न? सपना चौधरी की भाजपा में इंट्री कहाँ तक सही?

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दुःख होता है उन असंख्य कार्यकर्ताओं की पीढ़ा देखकर जिन्होंने अपनी पूरी जवानी भाजपा को यहाँ तक लाने में खपा दी और आजतक अपने लिये, अपने बच्चों या अपने परिवार के लिए भा.ज.पा. से “एक रुपये” की सहायता भी नहीं माँगी, बस चाह रखी तो भाजपा से “अपनत्व” की, “प्रेम की” व “सम्मान की” और उसे भी उनसे छीन कर सपना चौधरी जैसे फ़िल्मी कलाकार ले जाते हैं और भाजपा का यह कार्यकर्ता, पैराशूट से सीधा भाजपा के मंच पर उतरे व सीधा ही “वरिष्ठ भाजपा नेता” के पद से अलंकृत हुए सपना चौधरी जैसे नेता जी बने लोगों के लिए सामने कुर्सियों पर बैठ “तालियाँ” बजाते ही रह जाता है।फिर किसी सपना चौधरी के इंतज़ार में..!!

शायद हमारे नेता “राज सत्ता” की “चकाचौंध” में भूल गए की इसी भा.ज.पा. व् इसके देवतुल्य कार्यकर्ताओं के लिए, माँ भारती के सम्मान के संरक्षण के लिए हमारे प्रणेता “पण्डित दीन दयाल उपाध्याय जी ने अपने प्राणों की आहूति दे डाली (उनका रेलवे स्टेशन पर कत्ल कर दिया गया) और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी की हत्या अब तक राज है”..

पण्डित दीन दयाल उपाध्याय जी व डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के समय भी लोगों पर फ़िल्मी सितारों का अच्छा-खासा प्रभाव था परंतु मुझे ध्यान नहीं आता कि भारतीय जनता पार्टी के विकास व विस्तार हेतु भा.ज.पा. के इन आधारस्तंभों ने किसी हीरो या हेरोइन का सहारा लिया हो..!! बल्कि उन्होंने ऐसी नीति एवं व्यवस्था भारतीय जनता पार्टी में स्थापित की जिसके परिणामस्वरूप आम आदमियों की बस्ती से निकलकर ही अटल, आडवाणी, जोशी, मोदी, शाह जैसे आम लोग तराशे हुए “राजनीतिक कोहिनूर” का रूप ले सके और देश का नेतृत्व करने की क्षमता उनमें विकसित हुई।

क्या आज पण्डित दीन दयाल उपाध्याय जी व् श्यामा प्रसाद मुखर्जी की आत्मा खुश होगी ??.. क्या यही है उनके सपनों की भा.ज.पा. ?????

कैसे इन महापुरुषों ने अपना बलिदान दे भाजपा की नींव रखी थी, कैसे भाजपा को अनुशासन एवं भारतीय संस्कृति के पोषक के रूप में सींचा था, क्या सही मार्ग पर अग्रसर है भाजपा, जहाँ दिनो दिन सालों पुराना कार्यकर्ता हाशिये पर जाता जा रहा है और “faishonable राजनीति” का शौक रखने वाले “पैराशूट एंट्री” मार सीधा टिकट के दावेदार बन भाजपा जॉइन कर रहे हैं..जिन्हें भाजपा का क, ख, ग, भी नहीं पता।

क्या ऐसे ही बनेगा New India ?????

क्या योगदान है सुश्री सपना चौधरी जी का देश व समाज के लिए या भारतीय जनता पार्टी के लिए, जो इन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी की सदस्यता दिलवाई गयी ??

क्या यह कार्य पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी, श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी के बताए रास्ते पर चलने एवं उनके मार्गदर्शन के अंतर्गत आता है ?????

क्या भाजपा में अच्छे कार्यकर्ताओं का अकाल पड़ गया है जो अब ऐसे लोग पार्टी के तारणहार बनेंगे ?????

क्या अब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से भा.ज.पा. का विश्वास हट गया, जो RSS मोदी जी जैसे, अमित शाह जी जैसे नेता निर्मित कर सकती है, तो क्यों अब भाजपा को सपना चौधरी जैसे Fashionable Politics चाहने वालों पर भरोसा करना पड़ रहा है ?????

मेरा विरोध फिल्मी सितारों का भा.ज.पा. जॉइन करने से नहीं है बल्कि इस बात से है कि इन लोगों को पार्टी की सदस्यता देकर सीधा चुनाव लड़ने हेतु टिकट दे देना गलत है, पहले इन्हें कुछ वर्ष पार्टी की सेवा करने हेतु लगाया जाये, पार्टी की संस्कृति, नियमों, नीतियों, उद्देश्यों एवं कार्यशैली से अवगत कराया जाये और फिर यदि यह पार्टी की विचारधारा को अपनाने में सही पाये जाते हैं तो अग्रिम निर्णय लिया जाये। इन फिल्मी सितारों को सीधा MP का टिकट देकर चुनाव में उतार दिया गया, यह भी बहुत समझदार थे, इन्होंने भाप लिया कि चारों ओर मोदी लहर है तो भाजपा जॉइन करना ही ठीक है..बहती गँगा में हाथ धो लिया जाये और यह अपने मंसूबों में कामयाब भी हो गए और बैठे बैठाय माननीय साँसद भी बन गये.. लेकिन आगे क्या ?? चले गए सनी देओल जी वापिस मुम्बई, कह कर की मैंने अपना प्रतिनिधि बना दिया है..जो 6 माह नहीं रुक पाये अपनी जनता के बीच..क्या ऐसे लोगों को टिकट देने जायज़ था ?? अरे भाजपा के जो नेता यह कह रहे थे कि इन फ़िल्म स्टारों को टिकट दे दीजिए भाजपा को फायदा होगा वो नेता यह क्यों नहीं समझ पा रहे कि इन लोगों से भाजपा को कोई फायदा नहीं हो रहा उल्टा यही लोग भाजपा का फायदा उठा साँसद बन गये, अगर इनका कोई प्रभाव होता तो यह टिकट लेने के लिए पार्टी के पीछे नहीं भागते.. अगर इनका प्रभाव होता तो यह किसी भी पार्टी में जा उसे जितवा देते, यह क्यों भाजपा में आये ??

हमें भूलना नहीं चाहिये कि भा.ज.पा. की नींव को पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी एवं डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी जैसे बलिदानियों के खून ने सींचा है, हमें इसकी गरिमा व गौरव से किसी भी शर्त पर समझौता नहीं करना चाहिये।

– (लेकर के अपने विचार)

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