प्रदूषण से जूझते समाज का दर्द वयां करती अपनी कविता के माध्यम से सूर्या श्रीवास्तव

प्रदूषण से जूझते समाज का दर्द वयां करती अपनी कविता के माध्यम से सूर्या श्रीवास्तव गंजडुडवारा जनपद कासगंज

*प्रदूषण की समस्या ( स्वरचित )*

विश्व में फैला आज प्रदूषण, बची नहीं कोई जगह
नर्क सा जीवन बना यहां, दिल्ली देखो हो रही तबाह

हुआ प्रदूषण इतना घातक, फैलाता है बीमारी
इसी प्रदूषण के कारण कितनी जनता जाती मारी

इसी प्रदूषण के कारण , कितने जनजीवों को मार रहा
इसपर अपने न्यायलय का निर्णय भी बेकार रहा

क्या गंगा क्या जमना सतलुज सबकी एक कहानी है
पहले इनमें जल रहता था लेकिन अब वह पानी है

वायु प्रदूषण बड़ा रहे क्यों सांस नहीं ले पाओगे
मौत खड़ी होगी जब आगे मित्र बहुत पछताओगे

बन्द करो औधोगिक कचरा कृषि को जो कर नष्ट रही
फसल नहीं होगी धरती पर तुमको कर स्पष्ट रही

आज बचा लो इस धरती को कर विचार समझाती हूं मैं कुशाग्र नजरों में छोटी हूं पर ज्ञान की बात बताती हूं

अपनी कलम से…..✍🏻
सूर्या श्रीवास्तव बीएससी. पार्ट 1
पीजी काॅलेज गंजडुडवारा

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