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शनि हो चुके है वक्री:करते है इस समय न्याय

18 अप्रैल 2018 को सुबह से शनि वक्री हो चुके है अगले लगभग 6 महीने तक शनि वक्री रहेगे। शनि घनु राशि में मकर की तरह आगे बढ़ रहे थे। अब उल्टी चाल से चलेगे। शनि महाराज के वक्री होने की स्थिति में शनि महाराज के स्वभाव तथा व्यवहार में क्या बदलाव आ जाते हैं। समस्त ग्रहों में से शनि ही एकमात्र ऐसे ग्रह हैं जो वक्री होने की स्थिति में कुंडली धारक को कुछ न कुछ अशुभ फल अवश्य प्रदान करते हैं फिर चाहे किसी कुंडली में उनका स्वभाव कितना ही शुभ फल देने वाला क्यों न हो। किन्तु वक्री होने की स्थिति में शनि के स्वभाव में एक नकारात्मकता अवश्य आ जाती है जो कुंडली धारक के लिए कुछ समस्याओं से लेकर बहुत भारी विपत्तियां तक लाने में सक्षम होती है। यदि शनि किसी कुंडली में सामान्य रूप से शुभ फलदायी होकर वक्री हैं तो कुंडली धारक को अपेकक्षाकृत कम नुकसान और फायदा पहुंचाते हैं तथा ऐसी स्थिति में कुंडली में इनका स्वभाव मिश्रित हो जाता है जो कुंडली धारक को कभी लाभ तो कभी हानि देता है। लेकिन शनि ग्रह उम्र के पड़ाव अनुसार फल देते है। शनि युवा अवस्था में ज्यादा मारक होता है। 35 साल के ऊपर के लोगो पर मारक प्रभाव कम देखा गया है।शनि वक्री होने से पहले जो कार्य आपके जिस दिशा में चल रहे थे उन्ही पर कार्य करना चाहिए और उन योजनाओ पर मेहनत करना चाहिए। तब लाभ प्राप्त किया जा सकता है। बदलाब करने पर समस्या आ सकती है। शनि के साथ इस समय गोचर में मंगल चल रहा है इस लिए कुछ समय तक समस्या ज्यादा रह सकती है। जानकारों का मानना है कि न्यायधीश पर शनि का पूर्ण असर रहता है। कुछ चौकाने बाले फैसले न्यायलय दे सकते है। किसी के साथ अन्याय होने पर उसके साथ भी न्याय इसी समय काल में शनि महाराज करते है। यदि की गये हुए मानसम्मान को वापस करने का भी यही समय है। शनि किसी कुंडली में सामान्य रूप से अशुभ फलदायी होकर वक्री हैं तो कुंडली धारक को अपेकक्षाकृत बहुत अधिक नुकसान पहुंचाते हैं। किसी कुंडली में शनि सबसे अधिक नुकसान तब पहुंचाते हैं जब वे तुला राशि में स्थित हो, सामान्य रूप से अशुभ फलदायी हों तथा इसके साथ ही वक्री भी हों। तुला राशि में स्थित होकर शनि को अतिरक्त बल प्राप्त होता है तथा अशुभ होने की स्थिति में शनि वैसे ही इस अतिरिक्त बल के चलते सामान्य से अधिक हानि करने में सक्षम होते हैं किन्तु ऐसी स्थिति में वक्री होने से उनकी नकारात्मकता में और भी वृद्धि हो जाती है तथा इस स्थिति में कुंडली धारक को दूसरे ग्रहों की स्थिति को ध्यान में रखते हुए कोई नया कार्य करना चाहिए।

-लेख जानकारों के अनुसार आधारित

-देवेन्द्र प्रताप सिंह कुशवाहा

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