बरेली/फतेहगंज पश्चिमी:-रंगों का त्योहार होली पर्व को लेकर काउंट डाउन शुरू हो गया है।त्योहारी सामानों मसलन मेवा,रंग,पिचकारी से बाजार सज गए हैं।हर साल होली पर कुछ न कुछ नया होता है।इस बार भी त्येाहार पर हर्बल गुलाल की डिमांड देखी जा रही है।खास बात यह है कि पिचकारी बाजार में चाइना के साथ देशी उत्पाद भी सजाए गए हैं।ग्राहकों की भीड़ से बाजारों में बढ़ी रौनक से कारोबारी उत्साहित हैं।21 मार्च को होलिका दहन के बाद अगले दिन रंग-गुलाल उड़ाए जाएंगे।महज तीन दिन का वक्त शेष बचा है।पर्व पर रंग, पकवान और नए कपड़ों का खास महत्व रहता है।कस्बों के साथ ही जिले भर की अन्य छोटी-बड़ी बाजारों में रौनक बढ़ गई है।सड़क की पटरियों पर रंग-अबीर,पिचकारी,पापड़ की दुकानें सज गई हैं। परचून की दुकानों भी मेवा,मैदा और वनस्पति के खरीदारों की भीड़ दिख रही है।यह सिलसिला पूरे तीन दिन तक चलेगा।हर साल की तरह इस बार भी बाजार में कुछ न कुछ नए आइटम देखने को मिल रहे हैं।देशी के साथ ही चाइनीच पापड़-चिप्स से दुकानें सजी हैं।पिचकारी बाजार में इस मर्तबा चाइनीज के साथ देशी आइटमों की ज्यादा डिमांड दिख रही है।इसमें तरह-तरह के कार्टून,मास्क आदि बच्चों के आकर्षण का केंद्र बने हैं।रंग और गुलाल की खरीदारी में लोगों को एहितियात बरतते देखा जा रहा है।लोग केमिकल युक्त के बजाय हर्बल गुलाल को ज्यादा तरजीह दे रहे हैं।
*केमिकल युक्त रंग स्किन रोग के लिए घातक*
केमिकल युक्त रंगों के कारण कई समस्याएं पैदा होती हैं।यदि रंगों में ऑक्साइड,धातु,शीशे के कण जैसे खतरनाक व जहरीले केमिकल मिले हुए होंगे तो यह बेहद खतरनाक साबित हो सकते हैं।यह स्किन को सूखा बना देते हैं।लाल,काले,हरे जैसे गहरे रंगों में भारी मात्रा में मरकरी सल्फाइट,सीसा, कॉपर सल्फेट आदि होते हैं।जिससे स्किन कैंसर भी हो सकता है।यह आंखों के लिए भी खतरनाक हो सकते हैं।

– बरेली से सौरभ पाठक की रिपोर्ट

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